उत्तर प्रदेश में प्राइमरी स्कूल (कक्षा 1 से 5) में सहायक अध्यापक बनने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए Super TET 2026 सबसे बड़ा पड़ाव है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने इसका संशोधित सिलेबस जारी कर दिया है, और अब समय आ गया है कि हर विषय को गहराई से समझा जाए। इस लेख में हम सिर्फ प्राइमरी स्तर (कक्षा 1-5) के सिलेबस पर पूरी तरह फोकस करेंगे — हर विषय, हर उप-विषय, अंकों का बंटवारा और तैयारी की रणनीति, सब कुछ एक ही जगह।

Super TET प्राइमरी परीक्षा को पहले समझें
Super TET, UPTET से बिल्कुल अलग परीक्षा है। UPTET सिर्फ पात्रता (एलिजिबिलिटी) साबित करता है, जबकि Super TET असली भर्ती परीक्षा है जो सीधे मेरिट लिस्ट बनाकर नियुक्ति तक ले जाती है। जिन उम्मीदवारों ने UPTET पेपर-1 या CTET पेपर-1 पास कर रखा है, वे ही कक्षा 1 से 5 की इस भर्ती परीक्षा में बैठने के पात्र हैं। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो स्नातक (न्यूनतम 50% अंकों के साथ) के अलावा दो साल का D.El.Ed या चार साल का B.El.Ed होना अनिवार्य है।
परीक्षा का ढांचा — एक नज़र में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| परीक्षा | सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा 2026 (प्राइमरी, कक्षा 1-5) |
| कुल प्रश्न | 120 |
| कुल अंक | 360 |
| प्रति प्रश्न अंक | 3 अंक |
| नकारात्मक अंकन | प्रत्येक गलत उत्तर पर 1 अंक कटेगा |
| परीक्षा अवधि | 120 मिनट (2 घंटे) |
| प्रश्न का स्वरूप | चार विकल्पों वाले बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) |
| प्रश्नपत्र की भाषा | हिंदी और अंग्रेजी दोनों में |
| विषय-वस्तु का स्तर | भाषा, विज्ञान, गणित, पर्यावरण-सामाजिक अध्ययन — कक्षा 12 स्तर तक; शिक्षण कौशल, बाल मनोविज्ञान, सूचना तकनीकी, जीवन कौशल — D.El.Ed पाठ्यक्रम स्तर तक |
यह जानना ज़रूरी है कि अकादमिक विषयों (भाषा, विज्ञान, गणित, पर्यावरण-सामाजिक अध्ययन) का स्तर कक्षा 12 तक रखा गया है — यानी सिर्फ प्राइमरी कक्षाओं की किताबों तक सीमित रहकर तैयारी नहीं की जा सकती। वहीं शिक्षण से जुड़े विषयों (शिक्षण कौशल, बाल मनोविज्ञान, सूचना तकनीकी, जीवन कौशल) का स्तर D.El.Ed पाठ्यक्रम जितना रखा गया है।
चूंकि हर सही जवाब पर 3 अंक मिलते हैं और गलत जवाब पर सिर्फ 1 अंक कटता है, इसलिए बिल्कुल अनजान सवालों पर अंधाधुंध अंदाज़ा लगाने से बचना चाहिए — लेकिन अगर दो विकल्प यकीनन गलत लग रहे हों और बाकी दो में उलझन हो, तो सोच-समझकर जवाब देना फायदेमंद हो सकता है।
विषयवार प्रश्नों का बंटवारा
| विषय | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी | 30 | 90 |
| सामान्य ज्ञान और समसामयिक मामले | 25 | 75 |
| गणित | 16 | 48 |
| पर्यावरण और सामाजिक अध्ययन | 8 | 24 |
| विज्ञान | 8 | 24 |
| शिक्षण कौशल | 8 | 24 |
| बाल मनोविज्ञान | 8 | 24 |
| जीवन कौशल, प्रबंधन एवं अभिवृत्ति | 8 | 24 |
| तार्किक ज्ञान | 5 | 15 |
| सूचना तकनीकी | 4 | 12 |
| कुल | 120 | 360 |
अब हर विषय को विस्तार से समझते हैं।
1. हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी (30 प्रश्न — सबसे ज्यादा वेटेज)
भाषा खंड को सबसे ज्यादा भार दिया गया है, क्योंकि प्राइमरी शिक्षक को बच्चों की भाषा-नींव तैयार करनी होती है। इसमें तीन उप-भाग होते हैं:
हिंदी: व्याकरण के अंतर्गत संधि, समास, कारक, लिंग, वचन, काल जैसे पारंपरिक टॉपिक के साथ-साथ पर्यायवाची, विलोम, अनेकार्थी शब्द, मुहावरे-लोकोक्तियां और वाक्य शुद्धि (spelling, tense, gender से जुड़ी त्रुटियां सुधारना) भी पूछे जाते हैं। बोधगम्यता (comprehension) के लिए अपठित गद्यांश और पद्यांश दिए जाते हैं, जिन पर आधारित सवाल हल करने होते हैं। अलंकार, रस और छंद जैसे काव्य-शास्त्र के टॉपिक भी शामिल हैं।
संस्कृत: संस्कृत व्याकरण, प्रत्यय और उपसर्ग, वाच्य परिवर्तन, संस्कृत से हिंदी और हिंदी से संस्कृत अनुवाद, तथा संस्कृत साहित्य से जुड़े मूल प्रश्न पूछे जाते हैं।
अंग्रेज़ी: पार्ट्स ऑफ स्पीच, टेंस, एक्टिव-पैसिव वॉयस, डायरेक्ट-इनडायरेक्ट स्पीच जैसे व्याकरण टॉपिक के अलावा वाक्य रूपांतरण (simple, compound, complex sentences), पर्यायवाची-विलोम शब्द, मुहावरे और अनदेखे गद्यांश पर आधारित बोधगम्यता प्रश्न आते हैं।
तैयारी की सलाह: चूंकि इस खंड में सबसे ज्यादा (30) प्रश्न हैं, इसलिए रोज़ाना व्याकरण के नियमों का अभ्यास और अनदेखे गद्यांशों को हल करने की आदत डालना सबसे फायदेमंद रहेगा।
2. सामान्य ज्ञान और समसामयिक मामले (25 प्रश्न)
इस विषय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की समसामयिक घटनाएं, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश से जुड़ी घटनाएं, महत्वपूर्ण स्थान और व्यक्तित्व, प्रसिद्ध पुस्तकें और उनके लेखक, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार, खेल जगत की जानकारी, तथा भारतीय संस्कृति और कला से जुड़े सवाल शामिल होते हैं। यह विषय पूरी तरह डायनामिक है, यानी परीक्षा जितनी नज़दीक होगी, इससे पिछले 6-12 महीनों की घटनाओं पर उतना ही ज्यादा फोकस करना फायदेमंद रहेगा।
तैयारी की सलाह: रोज़ाना अखबार पढ़ने या किसी भरोसेमंद करेंट अफेयर्स स्रोत को फॉलो करने की आदत डालें, साथ ही उत्तर प्रदेश से जुड़ी योजनाओं और घटनाओं पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि राज्य-स्तरीय परीक्षा होने के कारण यहां से सवाल आने की संभावना ज्यादा रहती है।
3. गणित (16 प्रश्न)
गणित खंड में संख्यात्मक क्षमता, बुनियादी गणितीय संक्रियाएं, दशमलव, स्थानीय मान, भिन्न, साधारण ब्याज, लाभ-हानि, प्रतिशत, विभाज्यता के नियम, गुणनखंड, एकात्मक विधि, सामान्य बीजगणित, क्षेत्रफल-आयतन, औसत, अनुपात, बीजीय सर्वसमिकाएं, सामान्य ज्यामिति और सामान्य सांख्यिकी से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। यह विषय गणना आधारित होने की वजह से सबसे ज्यादा अभ्यास (practice) मांगता है।
तैयारी की सलाह: हर टॉपिक के फॉर्मूले अच्छी तरह याद रखें और रोज़ाना कम से कम 15-20 सवाल हल करने की आदत डालें, क्योंकि गणित में गति और सटीकता दोनों ज़रूरी हैं।
4. पर्यावरण और सामाजिक अध्ययन (8 प्रश्न)
इस विषय का दायरा काफी बड़ा है — पृथ्वी की संरचना, नदियां-पर्वत-महाद्वीप-महासागर, प्राकृतिक संपदा, अक्षांश और देशांतर, सौरमंडल, भारतीय भूगोल, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, भारतीय संविधान, भारतीय संस्कृति, हमारी शासन प्रणाली, यातायात और सड़क सुरक्षा, वर्तमान भारतीय अर्थव्यवस्था और उसकी चुनौतियां, सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण, और प्राकृतिक आपदा प्रबंधन जैसे टॉपिक शामिल हैं। चूंकि प्रश्नों की संख्या सिर्फ 8 है लेकिन दायरा बहुत बड़ा, इसलिए स्कोरिंग नज़रिए से यह विषय कम प्राथमिकता वाला माना जा सकता है, बशर्ते बाकी विषयों की तैयारी पूरी हो।
5. विज्ञान (8 प्रश्न)
विज्ञान खंड में दैनिक जीवन में विज्ञान का उपयोग, गति-बल-ऊर्जा-दूरी, प्रकाश और ध्वनि, जीवों की दुनिया, मानव शरीर की बनावट, स्वास्थ्य-स्वच्छता-पोषण, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन, तथा पदार्थ और उसकी अवस्थाओं से जुड़े बुनियादी प्रश्न पूछे जाते हैं। यह विषय ज्यादातर सामान्य विज्ञान (general science) के स्तर का है, गहरी वैज्ञानिक थ्योरी की जगह रोज़मर्रा से जुड़ी अवधारणाओं पर ज़ोर है।
6. शिक्षण कौशल (8 प्रश्न)
यह विषय पूरी तरह पेडागॉजी (शिक्षण-शास्त्र) से जुड़ा है, जो सीधे-सीधे यह जांचता है कि उम्मीदवार एक शिक्षक के तौर पर कितना तैयार है। इसमें शिक्षण की योजना और प्रबंधन, अधिगम (learning) के सिद्धांत, वर्तमान भारतीय समाज और प्राथमिक शिक्षा का संबंध, समावेशी शिक्षा (inclusive education), प्राथमिक शिक्षा में हो रहे नए प्रयास, शैक्षिक मूल्यांकन और मापन, आरंभिक पठन कौशल (early reading skills), तथा शैक्षिक प्रबंधन और प्रशासन से जुड़े सवाल आते हैं।
7. बाल मनोविज्ञान (8 प्रश्न)
बाल मनोविज्ञान का सीधा संबंध बच्चों को समझने की क्षमता से है। इसमें वैयक्तिक भिन्नताएं (हर बच्चा अलग कैसे सीखता है), बाल विकास को प्रभावित करने वाले कारक, सीखने की व्यक्तिगत आवश्यकताओं की पहचान, कक्षा में सीखने का सही माहौल बनाना, सीखने के सिद्धांत और कक्षा-शिक्षण में उनका व्यावहारिक प्रयोग, तथा दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए विशेष व्यवस्थाओं से जुड़े प्रश्न शामिल हैं।
8. जीवन कौशल, प्रबंधन एवं अभिवृत्ति (8 प्रश्न)
यह अपेक्षाकृत नया और व्यावहारिक विषय है, जो एक शिक्षक के पेशेवर व्यवहार को परखता है। इसमें व्यावसायिक आचरण और नीति, विद्यार्थियों को प्रेरित करने के तरीके, शिक्षक की अलग-अलग भूमिकाएं (सुविधा प्रदाता, अनुश्रवणकर्ता, नेतृत्वकर्ता और परामर्शदाता के रूप में), संवैधानिक और मानवीय मूल्य, तथा कक्षा में पुरस्कार और दंड व्यवस्था के प्रभावी और संतुलित प्रयोग से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।
9. तार्किक ज्ञान (5 प्रश्न)
रीज़निंग खंड में सादृश्य (analogy), अभिकथन और तर्क (assertion-reason), द्विआधारी तर्क, वर्गीकरण, घड़ी और कैलेंडर, कोडिंग-डिकोडिंग, कोडित असमानताएं, आलोचनात्मक तर्क, संख्या श्रृंखला, पहेलियां, प्रतीक और संकेतन, वेन आरेख, पासा, आंकड़ों की व्याख्या (data interpretation), दिशा ज्ञान परीक्षण, समूहीकरण-चयन और अक्षर श्रृंखला जैसे टॉपिक शामिल हैं। प्रश्न कम हैं, लेकिन ये आमतौर पर स्कोरिंग और कम समय में हल होने वाले होते हैं, इसलिए नियमित अभ्यास से यहां जल्दी अंक बटोरे जा सकते हैं।
10. सूचना तकनीकी (4 प्रश्न)
सबसे कम प्रश्नों वाला यह विषय आज के डिजिटल दौर की मांग है। इसमें शिक्षण कौशल विकास, कक्षा-शिक्षण और स्कूल प्रबंधन में सूचना तकनीकी के उपयोग, कंप्यूटर-इंटरनेट-स्मार्टफोन की बुनियादी जानकारी, ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज (OER), शिक्षण में उपयोगी ऐप्स, और डिजिटल शिक्षण सामग्री से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। यह विषय अपेक्षाकृत आसान माना जाता है क्योंकि ज़्यादातर सवाल रोज़मर्रा के डिजिटल अनुभव पर आधारित होते हैं।
पात्रता और योग्यता अंक
प्राइमरी शिक्षक पद के लिए स्नातक (न्यूनतम 50% अंकों के साथ) और D.El.Ed/B.El.Ed अनिवार्य है, साथ ही UPTET पेपर-1 या CTET पेपर-1 पास होना ज़रूरी है। उम्र सीमा सामान्य वर्ग के लिए 21 से 40 वर्ष है, जबकि OBC को 43 वर्ष तक, SC/ST को 45 वर्ष तक और दिव्यांग उम्मीदवारों को 55 वर्ष तक छूट मिलती है। योग्यता अंकों की बात करें तो सामान्य वर्ग को न्यूनतम 60% और आरक्षित वर्गों को न्यूनतम 55% अंक लाना ज़रूरी होता है।
प्राइमरी सिलेबस की तैयारी कैसे करें — पूरी रणनीति
- सबसे पहले पूरे सिलेबस को विषयवार बांट लें और हर विषय के लिए एक निश्चित समय-सारणी बनाएं, ताकि सभी दस विषयों को बराबर समय मिल सके।
- सबसे ज्यादा वेटेज वाले विषयों को प्राथमिकता दें — भाषा (30 प्रश्न), सामान्य ज्ञान (25 प्रश्न) और गणित (16 प्रश्न), ये तीनों मिलकर कुल 120 में से 71 प्रश्न, यानी करीब 59% हिस्सा कवर करते हैं। इन तीनों पर पकड़ मज़बूत होना सबसे ज़रूरी है।
- गणित और तार्किक ज्ञान के लिए रोज़ाना अभ्यास ज़रूरी है, क्योंकि इनमें गति के साथ-साथ सटीकता भी चाहिए। हर दिन कम से कम एक छोटा प्रैक्टिस सेट हल करें।
- भाषा खंड में व्याकरण और बोधगम्यता पर बराबर ध्यान दें — सिर्फ नियम रटने की बजाय अनदेखे गद्यांशों पर नियमित अभ्यास करें, ताकि परीक्षा में समय की बचत हो।
- सामान्य ज्ञान और समसामयिक घटनाओं के लिए रोज़ाना करेंट अफेयर्स पढ़ें, और परीक्षा से 2-3 महीने पहले की घटनाओं पर विशेष फोकस करें।
- शिक्षण कौशल और बाल मनोविज्ञान के लिए सिर्फ रटने की बजाय संकल्पनाओं (concepts) को समझने की कोशिश करें, क्योंकि इसमें अक्सर व्यावहारिक स्थितियों (situation-based) पर आधारित सवाल पूछे जाते हैं।
- नियमित मॉक टेस्ट दें — चूंकि इस परीक्षा में नकारात्मक अंकन है, मॉक टेस्ट से यह अंदाज़ा लगाना आसान होगा कि किन विषयों में अंदाज़े से जवाब देने की आदत नुकसान पहुंचा रही है।
- रिवीज़न का समय ज़रूर निकालें — हर हफ्ते बीते हुए विषयों को दोहराने के लिए अलग समय रखें, ताकि परीक्षा तक सारी जानकारी ताज़ा बनी रहे।
अंतिम सलाह
Super TET प्राइमरी सिलेबस भले ही दस विषयों में बंटा दिखे, लेकिन असल में यह एक संतुलित परीक्षा है, जिसमें अकादमिक ज्ञान (भाषा, गणित, विज्ञान, सामाजिक अध्ययन) और शिक्षण-संबंधी समझ (शिक्षण कौशल, बाल मनोविज्ञान, जीवन कौशल) दोनों को बराबर तवज्जो दी गई है। इसलिए सिर्फ किताबी ज्ञान पर निर्भर रहने की बजाय, एक असली शिक्षक की तरह सोचने और समझने की आदत डालना सबसे कारगर तैयारी की रणनीति साबित होगी।
चूंकि Super TET 2026 की आधिकारिक अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है, इसलिए आवेदन से पहले उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद की आधिकारिक वेबसाइट upbasiceduboard.gov.in या updeled.gov.in पर जाकर सिलेबस और परीक्षा पैटर्न की अंतिम आधिकारिक PDF ज़रूर जांच लें, ताकि किसी भी अंतिम समय के बदलाव से न चूकें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. Super TET प्राइमरी परीक्षा में कुल कितने प्रश्न पूछे जाते हैं? कुल 120 प्रश्न पूछे जाते हैं, जो 360 अंकों के होते हैं। हर प्रश्न 3 अंक का है।
2. क्या Super TET 2026 में नकारात्मक अंकन (negative marking) है? हां, नए पैटर्न के अनुसार हर गलत उत्तर पर 1 अंक काटा जाएगा। इसलिए बिना सोचे-समझे अंदाज़े से जवाब देने से बचना चाहिए।
3. परीक्षा की अवधि कितनी होती है? परीक्षा 120 मिनट यानी 2 घंटे की होती है।
4. Super TET प्राइमरी (कक्षा 1-5) में कौन बैठ सकता है? वे उम्मीदवार जिन्होंने UPTET पेपर-1 या CTET पेपर-1 पास किया है और स्नातक के साथ D.El.Ed/B.El.Ed की योग्यता रखते हैं, वे इस परीक्षा में बैठ सकते हैं।
5. सबसे ज्यादा प्रश्न किस विषय से पूछे जाते हैं? सबसे ज्यादा 30 प्रश्न हिंदी-संस्कृत-अंग्रेज़ी (भाषा खंड) से पूछे जाते हैं, उसके बाद सामान्य ज्ञान से 25 प्रश्न और गणित से 16 प्रश्न आते हैं।
6. क्या प्रश्नपत्र हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में उपलब्ध होगा? हां, प्रश्नपत्र हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में जारी किया जाएगा।
7. सामान्य वर्ग और आरक्षित वर्ग के लिए योग्यता अंक (qualifying marks) कितने हैं? सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 60% और OBC/SC/ST/दिव्यांग वर्ग के लिए न्यूनतम 55% अंक लाना ज़रूरी है।
8. अकादमिक विषयों (भाषा, गणित, विज्ञान, सामाजिक अध्ययन) का स्तर कितना रखा गया है? इन विषयों की विषय-वस्तु का स्तर कक्षा 12 तक रखा गया है, जबकि शिक्षण कौशल, बाल मनोविज्ञान, सूचना तकनीकी और जीवन कौशल जैसे विषयों का स्तर D.El.Ed पाठ्यक्रम के बराबर है।
9. Super TET प्राइमरी के लिए उम्र सीमा क्या है? सामान्य वर्ग के लिए 21 से 40 वर्ष, OBC के लिए 43 वर्ष तक, SC/ST के लिए 45 वर्ष तक और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए 55 वर्ष तक उम्र सीमा में छूट है।
10. आधिकारिक सिलेबस PDF कहां से डाउनलोड करें? आधिकारिक सिलेबस और अधिसूचना उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट upbasiceduboard.gov.in या updeled.gov.in पर उपलब्ध होगी। आवेदन से पहले वहीं से अंतिम PDF ज़रूर जांच लें।
